Monday, April 5, 2010

मुस्कुराहट

कई मुद्दतों बाद
एक दोस्त मिला आज
वो मुस्कुरा रहा था
मैं भी मुस्कुरा रहा था
हम दोनो मुस्कुरा रहे थे
मुस्कुरा रहे थे हम दोनो
यह जतलाने के लिये
कि देखो
मुस्कुरा रहे हैं हम!
अपनी मुस्कुराहट को मैं समझता था
मुस्कुराते हुये सोच रहा था
सोचते हुये डर रहा था
डरते हुये मुस्कुरा रहा था
और युं ही मुस्कुराते हुये
मुझे हुआ एक शुबहा..
कि मेरा दोस्त
कहीं सच में तो नहीं मुस्कुरा रहा !

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